ना समझ सी मैँ – रेखा मित्तल

नासमझ सी मैँ पता नहीं सुधर रही हूँ या बिखर रही हूँ थक गई हूँ समझाते-समझाते नहीं दिखा सकती अपने मन की बेचैनियाँ अधकचरे ख्वाबों की दास्ताँ जीवन के इस…

“डिजिटल तकनीक के साथ पुस्तकें नए आधुनिक अवतरण में आनी चाहिए”-अवधेश कुमार

Vivratidarpan.com (नई दिल्ली / एटा) – दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम के विराट भवन 53 वें वर्ल्ड बुक फेयर “विश्व पुस्तक मेला में जिज्ञासा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित एटा…

आस्था और परंपरा के केंद्र बाबा वैद्यनाथ और वासुकिनाथ – पवन वर्मा

vivratidarpan.com – माघ माह की ठंडी सुबह। मकर संक्रांति का दिन। होटल से बाहर निकलते ही यह भ्रम टूट जाता है कि ठंड के कारण भीड़ कम होगी। बाबा वैद्यनाथ…

तिथि – सविता सिंह

कुछ तिथियाँ कैलेंडर में नहीं होतीं, वे हृदय में दर्ज होती हैं। उन दिनों मन उदास नहीं होता, बस उनके पास चला जाता है। जनवरी फिर आ गया है। कैलेंडर…

इक साल कम हो गया – विनोद निराश

सुनो जी ! लोग कहते थे, मगर अब सच लगने लगा, पुराना साल विदा क्या हो गया ?, मेरी ज़िंदगी का इक साल कम हो गया। वो चन्द पुरानी यादें,…