मेरी कलम से  – रुचि मित्तल

दुनिया की भीड़ में कहीं खोई हुई हूँ मैं, मुद्दत हुई अकेले में खुद से नहीं मिली।   हो ही न जाए आप पर इसका असर हुज़ूर, कैसे दिखाऊँ आप…

अंतर्राष्ट्रीय रामायण कॉन्फ्रेंस, बनारस में इंजी. संतोष कुमार मिश्र ‘असाधु’ का हुआ सम्मान

vivratidarpan.com जबलपुर – विगत दिवस अंतर्राष्ट्रीय रामायण शोध संस्थान अयोध्या ,शोध संस्थान वृंदावन एवं तारक सेवा मंडल बनारस के संयुक्त तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘ भारत की अस्मिता: श्रीराम…

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। बैठक के दौरान ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार‘ अभियान…

तानसेन आ जाओ – अनिल भारद्वाज

धरती अंबर चांद सितारे साथ तुम्हारे गाते, तानसेन आ जाओ तुमको मेरे गीत बुलाते। तुम जब मेघ राग गाते थे धरती गगन झूम जाते थे, लगता जैसे सावन आया बदरा…

सर्दियों का आगमन – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

शीत का हो गया है पुनः आगमन, रात लंबी घटें दिन लगा ज्यों ग्रहण।   नित्य गिरता रहे न्यूनतम ताप अब, बेबसों को सताये निशा की गलन।   वस्त्र सब…

कौन सुनेगा, किसको सुनाए कबीर सी खरी खरी – डॉ. सुधाकर आशावादी 

vivratidarpan.com – कबीर जब तक थे, खरा खरा बोलते थे। कागज कलम का उपयोग करते थे या नहीं, यह शोध का विषय है। कबीर के दोहे, धर्म, जाति, क्षेत्र की संकीर्णता…

ऋषिकेश के लाल पानी में निर्माणधीन एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्लांट का डीएम ने किया स्थलीय निरीक्षण

जिलाधिकारी ने सोमवार को ऋषिकेश के लालपानी क्षेत्र में निर्माणाधीन एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों…

पीआरएसआई की प्रदर्शनी में दिखी समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड की छटा

देहरादून। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आज सोमवार सायं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन हो गया। अधिवेशन में रूस से आए प्रतिनिधियों…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

ओढ़कर गांधी लबादा एक घर आबाद है । बोस का संघर्ष बोलो क्या किसी को याद है । इंडिया भारत बताया चाल तो देखो जरा , इस तरह का विश्व…

नदी – निहारिका झा

आओ तुमको आज सुनाऊं अपने उद्गम की मैं  कहानी कोई नदी कहता मुझको कोई  मुझे  कहता तटिनी कहीं कहें सरिता, सलिला बस प्रवाह है मेरा काम ऊंचे पर्वत से मै…