पितरों के प्रति श्रद्धा – सुनील गुप्ता

रख के श्रद्धा सुमन भाव चढ़ा, श्राद्ध मनाएं !!1!! देते सम्मान पितृ इच्छानुसार, तर्पण करें !!2!! नम आँखों से पितृ भोग चढ़ाके, प्रणाम करें !!3!! तृप्त पितर शुभाशीर्वाद देते, कल्याण…

ख्वाब उसका नहीं फलता – गुरुदीन वर्मा

  अंत में होता यही है, ख्वाब उसका नहीं फलता। बेटी होती है पराई, हक उसको नहीं मिलता।। अंत में होता यही है——————।।   आँखों का तारा थी तू तो,…

रिश्तों की गूंज – प्रियंका सौरभ

  रिश्ते – वो मौन स्पंदन, जो न फासलों से बंधते हैं, न ही समय की सीमाओं से, ये तो दिल की उस गहराई में बसते हैं, जहाँ हर एहसास…

ताज नगरी की कवयित्रियों का लाल किले में आयोजित हिंदी सभा में हुआ सम्मान

दिल्ली – प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में आयोजित 13 व 14 सितंबर 25 को हिंदी सम्मेलन व राष्ट्रभाषा अभिव्यक्ति सभा में देश भर से आए हिंदी प्रेमियों ने…

राजा कंस नारायण और दुर्गोत्सव की परम्परा – मृणांक शेखर घोषाल

vivratidarpan.com – दुर्गोत्सव की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। पौराणिक काल से ही दुर्गापूजा होती चली आ रही है। ऋग्वेद में अंबिका, तैत्तिरीयारण्यक में उमा एवं हेमवती, नारायण उपनिषद् और दुर्गागायत्री…