अदालतों में न्याय-प्रतीक्षा में साढ़े चार करोड़ लोग – मनोज कुमार अग्रवाल

vivratidarpan.com – अपने देश में आम आदमी को न्याय मिलना काफी दुष्कर हो गया है। समय पर न्याय, न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास की आधारशिला है, जैसा कि इस…

वर्षा फुहार – श्याम कुंवर भारती

  आप अकेले क्यों भींग जाने लगे । बारिश में मुझे क्यों भूल जाने लगे।   रिमझिम फुहार वर्षा अंग सिहराये। यादों के झरोखों में बदन लहराए। हवाओं के संग…

स्त्री पुरुष संबंध – रेखा मित्तल

  मुड़ जाती हैं स्त्रियां बार बार उन रास्तों पर जहां वह रुसवा हुई नहीं तलाश पाती अपने लिए एक नया आसमान ऐसा प्रेमवश कतई नहीं पर शायद उन्होंने देखी…