vivratidarpan.com – आज की निरंतर बदलती जीवनशैली और उपभोक्तावादी सोच ने हमारे सामाजिक संबंधों की बुनियाद को ही डगमगा दिया है। रिश्तों में प्रेम, विश्वास और अपनापन अब उतना सहज…
जिंदगी मे यार कब रहबर मिले, प्यार के प्यासे सभी दिलबर मिले। लौटना था आपका साहिल से बस, मैने कब सोचा मुझे ये भँवर मिले। चाँद ढूँढे…
(शेर)- गर तुमसे कहे कोई, आवो खो जावो तुम मेरी मस्ती में। क्या रखा है जिंदगी में, करो मौज, चाहे आग लगे बस्ती में।। लेकिन मैं तुमसे ऐसी उम्मीद…
Vivratidarpan.com – हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ स्क्रीन पर दिखना असल में जीने से ज़्यादा जरूरी हो गया है। जहां ज़िंदगी कैमरे के फ्रेम में…