तुम चाहे मानो मत मानो , पर मेरा विश्वास अटल है । मज़हब अगर नहीं होते तो ,रूप जगत का न्यारा होता ।। जाति धर्म के बंध न होते ,…
लगता है ये मेघ मेरी तरह है, कभी बेमौसमी उमड़ते है, जैसे मेरे मन के भाव हो, कभी टपकते है धीमे- धीमे, ओस की ठंडी बूंदें बनकर, जैसे आंखों…