अंजनी के पुत्र धीर बजरंगी महावीर,
ध्यान लगा राम में वे नाम ही जपा करें।
आंजनेय भक्त बड़े सेवा हेतु सदा खड़े,
रामकाज सदा बने यत्न ये किया करें।
भक्त जब पुकारते अशीष दे के तारते,
विपदाएं भक्तों की हनुमत हरा करें।
लाल देह लाल वस्त्र हाथ गदा महाअस्त्र,
दानव सिंदूरी वर्ण देख के डरा करें।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा , उत्तर प्रदेश
