होली का रंग रंगीला हास्य फल – सुधाकर आशावादी 

vivratidarpan.com – लोक संस्कृति और लोक परम्परा में उल्लास और मस्ती का पर्व होली हर वर्ष की भाँति नियत समय पर आ गया है। इसे आना ही था, फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन, तदुपरांत रंगों से सराबोर रंगपाशी। बदलते मौसम में टेसू के फूलों संग देह स्नान के साथ पुराने गिले शिकवे भूलकर दुश्मन को भी गले लगाने का सन्देश देने वाला पर्व सामाजिक समरसता की रीढ़ है। या तो दीवाना हंसे या तू जिसे तौफीक दे, वरना इस दुनियाँ में आकर मुस्कराता कौन है ? हा हा ही ही जैसी मुक्त हँसी के लिए जिस दौर में लोग तरसते हैं। रोजी रोटी की चिंता में उलझे आम आदमी के लिए वर्ष भर में केवल एक ही दिवस ऐसा आता है, कि जब व्यक्ति स्वयं को ही भूल जाता है। इस पुनीत पर्व पर आपकी राशि क्या कहती है, जानिए और आनंद लीजिए। इस हास्य फल के पूर्ण रूप से सही सिद्ध होने की कोई गारंटी नहीं है। कुछ बुरा लगे, तो सहन कीजिएगा, क्योंकि बुरा मानने का होली में किसी को कोई अधिकार नहीं होता।
मेष ( अ, चू , चे, चो, ला, ली, ले, लो,आ ) –
इस राशि के बालकों की समस्या यही रहती है, कि स्कूल से लेकर रोजगार के स्थलों तक जब भी कोई सूची बनती है, तो उनका नाम पहले नंबर पर रखा जाता है तथा सारे प्रयोग उसी के प्रारम्भ किये जाते हैं। रंगपाशी पर ऐसे जातक अपने साथियों के पीछे छुप कर होली खेलें, खुलकर होली खेलने से पानी भरे गुब्बारों से चोट लग सकती है।
वृषभ ( ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) –
इस राशि के जातक का स्वामी बैल होता है। बैल जैसी कर्मठता उसमें कूट कूट कर भरी रहती है। ऐसे जातक शर्मीले स्वभाव के होते हैं। रंगपाशी पर ये घर के बाहर निकलने का साहस नहीं कर पाते। ये पत्नी भक्त होते हैं। बिना पत्नी की आज्ञा के कोई भी कार्य नहीं कर पाते । इनका समर्पित भाव होली पर भी बना रहेगा। ऐसे जातकों को पत्नी के भरोसे रहने में ही भलाई है।
मिथुन ( (का, की, कू, घ, ड़ , छ , के, को, हा ) –
इस राशि के जातक खुलकर होली खेल सकते हैं। हालांकि पड़ोस में ताँका झांकी करने से शारीरिक कष्ट हो सकता है। कुविचार का त्याग कर सद्भावना से होली खेलें। पुरुष पुरुषों से गले मिलें और महिलाएं महिलाओं से। गले मिलने में प्रतिकूल आचरण गृहस्थ जीवन में दरार का कारण बन सकता है। मन में उत्पन्न होने वाले विकृत भावों पर नियंत्रण रखें।
कर्क ( ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो ) –
हर हाल में खुश रहना व खुश दिखाई देना हर किसी के वश में नहीं होता। कुछ लोग रोने के बहाने ढूंढते हैं। इस राशि का जातक ही ही हू हू हे हे जैसी हँसी हँसता है। होली पर मजाक करने से परहेज न करें। यदि कोई मजाक का बुरा मानने लगे, तो बुरा न मानो होली है, कहकर उसे गले लगाने में देरी न करें। याद रखें कि आपके शरीर से परफ्यूम की महक आ रही हो।
सिंह ( मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) –
इस राशि के जातक केवल राशि से ही सिंह होते हैं, अपने घर में भीगी बिल्ली ही बने रहते हैं। अज्ञात भय इनके मन में समाया रहता है। होली पर पत्नी के कोप से बचने का एकमात्र उपाय है, कि पत्नी के सुर में सुर मिलाएं, पत्नी को क्रोध न दिलाएं। अन्यथा बात बिगड़ने पर नीले ड्रम जैसी स्थिति से गुजरना पड़ सकता है। सो सावधानी ही बचाव है।
कन्या ( टो, प, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो ) –
राशि से कन्या होने से हर जातक कन्या नहीं हो जाता। कन्या राशि के जातक स्वभाव से चंचल होने के साथ नाजुक भी होते हैं। खट्टे पानीसे भरे गोलगप्पे खाने से परहेज न करें। मूंग की दाल से बने व्यंजनों का सेवन सीमित मात्रा में करें। नाबालिग बालिकाओं से दूरी बनाएं तो सुरक्षित रह सकते हैं, अन्यथा पर्व मनाए जाने में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
तुला ( रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते ) –
यथा नाम तथागुण इस राशि के जातकों की विशेषता होती है, किन्तु होली पर मस्ती और ठिठोली में ऐसे जातक कुछ भी सोचने समझने की स्थिति में नहीं रहते। तराजू के दोनों पलड़ों में घटत बढ़त के बीच संतुलन नहीं बना पाते। इस दिन जहाँ जो भी मिलें उसका सेवन करें। मीठा, नमकीन, खट्टा, तीखा खाने से कोई परहेज न करें।
वृश्चिक ( तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यि, यू ) –
इस राशि का जातक बिच्छू प्रजाति के गुणों से सन्नद्ध होता है। न जाने कब किसके डंक मार दे। इस बार इस राशि के जातकों में परिवर्तन के संकेत हैं। मीठा बोलकर ये अपने सगे सम्बन्धियों का दिल जीतने में सफल होंगे। नफरत के दौर में प्यार की दुकान खोलने का जो संकल्प लिया है, वह रंगपाशी की शाम तक रहेगा। उसके बाद ये अपने पुराने स्वरूप में आ सकते हैं।
धनु (ये, यो, भा , भि, भू, धा, फा, ढा, भे) –
इस राशि के जातकों के लिए भाभी से होली खेलना भारी पड़ सकता है। सो भाभी से दूरी बनाना ही श्रेयस्कर है। बिना पंख के उड़ने की कल्पना सफल नहीं होगी। नशीले पदार्थो का सेवन करने वाले मित्रों से बचें। बदनाम होने की संभावना है। किसी ने कहा भी है कि बद अच्छा बदनाम बुरा। किसी भी व्यक्ति को अपशब्द बोलने से बचें। देह पर संकट मंडरा सकता है।
मकर ( भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी ) –
इस राशि के जातक के लिए यह पर्व सर्वाधिक शुभ है। होली के उपरांत इनका भाग्योदय संभव है। बरसों से लंबित कार्य पूर्ण होंगे। कोर्ट कचहरी के झंझटों से छुटकारा मिलेगा। रंगपाशी पर अपने मुँह पर काला रंग पोतकर रखने से पहचान छिपी रह सकती है। किसी से छेड़छाड़ करके पुनः पुलिस के चंगुल में फंसने से बचें।
कुंभ ( गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा ) –
इस राशि के जातक घड़े के गुणों से भरे होते हैं। वैसे सामान्य जीवन में घड़े का उपयोग काम ही गया है, चिकने घड़े की संज्ञा में ये जातक खरे उतरते हैं। कांजी के बड़े भी इन्ही की कृपा से स्वादिष्ट बनते हैं। रंगपाशी के अवसर पर इन्हें स्वाद शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किए जाने का योग बन रहा है। सो यह फेसबुक या सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि का प्रचार कर सकते हैं।
मीन (दी, दू, थ, झ, दे, दो, चा, ची) –
जिन्हें अपने आप पर विश्वास होता है, वे मछली की आँख पर निशाना साध कर अपना लक्ष्य भेदते हैं। होली पर उनकी मनोकामना पूर्ण होने का योग है। मन की बात खुलकर कह सकते हैं। सहमति मिलेगी, लेकिन ख़ुशी स्थाई नहीं रहेगी। अपने बचपन के अब तक होली के प्रसंग याद करके ही मन को बहला सकते हैं। अति उत्साह में आकर कोई ऐसा कदम न उठाएं, की अपनी ही नजरों से बचना पड़े। (विभूति फीचर्स)

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