हिंदी के कवि भुलाए ,उर्दू के शायर बुलाए,
कैसा हुआ व्यवहार,मेरे उत्तराखंड में ।
कृत्य अर्थ हीन हुए, भाव से विहीन हुए, ।
हिंदी हुई शर्मसार, मेरे उत्तराखंड में ।।
उर्दू का चढ़ा बुखार ,हिंदी दीखती लाचार ,
राज भाषा है बीमार, मेरे उत्तराखंड में ।
सोलह दिन मान श्राद , हिंदी को करें हैं याद ,
कविता है तार तार, मेरे उत्तराखंड में ।।
– जसवीर सैंघ हलधर , देहरादून
