vivratidarpan.com – दीपावली आने को है,.. हर घर में नया उत्साह है, सभी जगह तैयारियां चल रही हैं,.. ढेर सारे सामान ऑनलाइन आ रहे हैं। सारी कॉलोनी में मानो नई जान आ गई थी। बच्चे- बूढ़े सभी आनंद से भरे थे, पर घर में काम करने वाली बाई सुमन के मन में उत्साह नहीं था।
” क्या बात है सुमन दीदी आप उदास क्यों हैं.. “?
घर की बेटी प्रीति ने पूछा।
” दीदी हम लोग अपने घर पर शुद्ध पकवान, नमकीन, दीपक, सजावट के वन्दनवार,मोमबत्ती आदि बना रहे हैं, ताकि इनको बेचकर दिवाली में कुछ पैसा मिले,पर आप सभी तो यह सब ऑनलाइन मंगा रहे हैं। तब हमारे सामान कौन खरीदेगा.. हमारी दीपावली फीकी रह जाएगी दीदी.. “. कहते-कहते दो आंसू उसकी आंखों से लुढ़क गए।
प्रीति का मन वेदना से भर गया अपनी सेवा करने वाली बाई के लिये।
वह बोली,” चिंता मत करो सुमन दीदी, आप सभी का पर्व भी अच्छा ही होगा.. हम सब साथ-साथ रहते हैं, और आप सभी दिनभर हमारे लिए मेहनत करते हैं, हम सब आपका ध्यान अवश्य ही रखेंगे।”
प्रीति ने तुरंत ही अपनी सभी सहेलियों की ऑनलाइन मीटिंग की, और इस विषय पर चर्चा की।”जो दिन-रात हमारी सेवा को हाजिर रहते हैं, उनको भी खुशियां पाने का पूरा अधिकार है, और हम सब का दायित्व है यह।” प्रीति ने दलील दी। सभी प्रीति के विचारों से सहमत थे व सबने एक योजना बना ली।
अगली सुबह प्रीति ने सुमन को उनकी बस्ती में दीपक, वंदनवार रंगोली, बैग व पकवान बनाने का संदेश दे दिया और कहा कि “इस रविवार आप सभी इसी कॉलोनी के ग्राउंड में सब कुछ लेकर आयें, हम सभी सिर्फ वही खरीदेंगे।”सुमन का मन हर्ष, उल्लास व कृतज्ञता से भर गया।
आज कॉलोनी के ग्राउंड में सभी आसपास रहने वालीं,काम करने वालों के स्टाल लगे थे। नमकीन, मठरी,दीपक, वंदनवार, रंगोली,बैग और भी कई तरह के आइटम थे और विनम्रता से मुस्कुराते हुए कामवालियाँ और उनके परिवार के सदस्य अपने-अपने आइटम सभी को बेच रहे थे।
कॉलोनी के सभी निवासियों के मन में संतोष का भाव था और कामवालियों के परिवार की आंखों में हर्ष के दीपक झिलमिला रहे थे। (विभूति फीचर्स)
