स्वाद इश्क का – श्याम कुंवर भारती

 

चाहत है बड़ी मेरी खुशियां सारी तेरे नाम हो जाए।

पता नहीं कब कैसे अब जिंदगी की शाम हो जाए।

 

हुआ है हादसा बड़ा तुमसे दिल लगाने का पहले।

ला पिला अपनी आंखों से इश्क-ए-जाम हो जाए।

 

मैं तड़पूं दिन रात तेरे लिए फर्क तुझे पड़ता कहा है।

चाहता है नाम लेके तेरा आशिक बदनाम हो जाए।

 

दिया तूने ठोकर मुझे और सोचा बदल जाऊंगा मैं ।

इश्क न हुआ कम तेरे इश्क फांसी सरेआम हो जाए।

 

चखा कर स्वाद इश्क दीवाना बनाया था तूने मुझे।

भुला के चाहता है तू भारती अब नाकाम हो जाए।

– श्याम कुंवर भारती, बोकारो , झारखंड, मॉब.9955509286

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