गया वर्ष पिछला नया साल आया।
सभी के दिलों में नवल हर्ष छाया।1
मिले जब कभी भी हमें तुच्छ कंटक,
चुने धैर्य से तब सुगम पथ बनाया।2
हुआ सामना दर्द-दुख से कभी यदि,
दिखा धैर्य-पौरुष गमों को हराया।3
सभी कामनाएँ नहीं पूर्ण होतीं,
तनिक छोड़ करके बहुत हर्ष पाया।4
खुशी से सभी पर्व सबने मनाये,
दिवस आखिर भी मुदित हो मनाया।5
विदा ले गया हो भले साल पिछला,
सभी ने खुशी से घरों को सजाया।6
पदार्पण किया जिस घड़ी वर्ष नव ने,
पलक पाँवड़े तब सभी ने बिछाया।7
-कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
