सोचो जरा–? – गुरुदीन वर्मा

 

सोचो जरा हालात, तब कैसे होंगे।

चिराग बेरोशन, जब अपने भी होंगे।।

सोचो जरा हालात——————–।।

 

फिक्र औरों की भी, करना सीखो।

वरना बर्बाद सपनें, अपने भी होंगे।।

सोचो जरा हालात——————।।

 

बुझाओ नहीं आग अपनी, लगाकर आग।

राख आशियानें तो, अपने भी होंगे।।

सोचो जरा हालात——————-।।

 

छोड़ो नहीं अपनी जमीं को कभी भी।

कब्र में पैर तो, अपने भी होंगे।।

सोचो जरा हालात—————-।।

 

करो मोहब्बत, अपने वतन से भी तुम।

खत्म नामो-निशां, अपने भी होंगे।।

सोचो जरा हालात——————।।

– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)

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