सावन की अप्रतिम यादें – सुनील गुप्ता

 

( 1 ) आया झूमके सावन

बरसी प्रेम खुशियाँ…,

छायी चहुँ ओर अप्रतिम यादें !!

 

( 2 ) झूमा मन कानन

खिल उठी कलियाँ,

चला मन मयूर नाचे  !!

 

( 3 ) झूला पड़ा आँगन

चली यौवना खिलखिलाए,

देख प्रियतम मुस्कुराए  !!

 

( 4 ) गाएं पक्षी विहंग

कोयल तीतर कूके,

उमंगित तन-मन हर्षाए !!

 

( 5 ) धरा ओढ़े चुनरिया

चली हरियाली बिछाए,

बहे आनंद खुशहाली सरसाए !!

– सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान

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