फिर से धरती रही पुकार,
साथियों हो जाओ तैयार ।
वर्दी दिख रही जो खूंटी पर,
एक निगाह लो उस पर मार।
पानी की एक बोतल ले लो,
शक्करपारे के पैकेट दो चार।
साथियों हो जाओ तैयार ।
मात पिता को समझा दो अपने,
दुश्मन ने मैदान दिया बुहार।
सब बहू बेटियों से कह दो,
मनाएंगे दीवाली का त्यौहार ।
पत्नी को कह दो बचा हुआ,
मातृभूमि का थोड़ा और उधार।
साथियों हो जाओ तैयार ।
पास पड़ोसी को बतला दो,
ध्यान रखेंगे खेती घर परिवार।
और डाकिए को समझा दो,
जल्दी से लाकर देगा तार।
कब आ जाए बुलावा सीमा से,
इसका नहीं है कोई एतबार।
साथियों हो जाओ तैयार ।
मुनुवा को समझो दो अपने,
अब तू ही घर का पालनहार।
हर हाल से अब तुम्हें निपटना,
तुम ही हो इस घर की दीवार।
हम तो चले देश के खातिर,
देखो गाड़ी रही है सीटी मार ।
साथियों हो जाओ तैयार।।
– हरी राम यादव, सूबेदार मेजर (आनरेरी)
अयोध्या, उत्तर प्रदेश
