समझौता – रश्मि मृदुलिका

बेमन से या मन से हामी भरना है,
मुठ्ठियों में जलती आग रखना है,
कटु रहस्य इस दुनिया का है,
सबसे बड़ी सच्चाई समझौता है,
समझौता कभी अनचाहे रिश्तों से,
कभी मन में रचे सम्बंधों से,
और कभी स्वयं से ही एक समझौता,
सत्य है बहुत कठिन है एक समझौता,
सीमित संसाधन में काम चलाना हो,
या असीमित में योग्य का चुनाव हो,
ढेर से जैसे एक – एक कण चुनना हो,
लगता कभी ,जैसे जीवन ही समझौता हो,
एकांत की ढूंढ में बैचेन आत्मा है,
अपनों की जैसे पहचान करता है,
उम्मीदों का जैसे बहता एक रेला है,
सत्य है भीड़ से बचना भी समझौता है,
अधूरी ख्वाहिशो में मुस्कुराना है,
पूरे स्वप्न्नो में व्याकुल सी एक रात्रि है,
सन्नाटे में जैसे हृदय सा अकुलाया है,
अनुरागी मन को बहलाना भी समझौता है,
– रश्मि मृदुलिका, देहरादून, उत्तराखंड

 

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