सप्तपदी – सुनील गुप्ता

( 1 )” स “, सर्वप्रथम एकपदी

रखते चलें..,

सुदृढ़ता संग जीवन रचते  !!

 

( 2 )” प् “, प्यार सौगात

उपहार अद्वितीय …,

बनाएं ऊर्जावान द्विपदी हमें !!

 

( 3 )” त “, तरंगित उमंगित

त्रिपदी धरें….,

बढ़ें समृद्धि की ओर हर्षाते !!

 

( 4 )” प “, पसंद नापसंद

एकरूपता धरते…,

चतुष्पदी सौभाग्य जगाए चले !!

 

( 5 )” दी “, दीक्षा शिक्षा

चलें देते….,

उठाएं पञ्चपदी बच्चों के लिए !!

 

( 6 )” षट्पदी “, षट्पदी खिलाए

जीवन ऋतुएं…,

आनंद उत्सव प्रेम बहार लाए  !!

 

( 7 )” सप्तपदी “, सप्तपदी आनेवाले

सात जन्मों तक…,

बखूबी संग-साथ चले निभाए !!

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

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