सद्गुणों से दुर्गुणों पर जीत पाना है हमें।
शुद्ध मन से ही विजय दशमी मनाना है हमें।
गीत से नवगीत से ऐसी करें परिकल्पना।
अब बुराई नाश होगी सब करें उद्घोषणा।
भ्रूण हत्या बंद हो नारी सुरक्षित हो सके।
अंधकूपों से निकालें मनुज की शुभ भावना।
नव मशालों से तिमर को अब मिटाना है हमें।1
क्रोध ईर्ष्या द्वेष लालच जीत इन पर आज हो।
मन अहं कुविचार सारे आज से ही नाश हो।
जातिवादी यह व्यवस्था दूर कर सब देश से।
भाइ चारे और समरस से भरा ये’ समाज हो।
जीत कर सारी बुराई अब दिखाना है हमें।2
राक्षसी व्यवहार जीतें और सँग आतंक को।
राह गलियाँ कर सुरिक्षत शमित कर दें’ कलंक को।
आपसी समभाव से पोषित करें यह देश अब।
साम्प्रदायिकता बढ़ाये सोख लें उस पंक को।
धर्म केवल जोड़ता साबित कराना है हमें।3
सद्गुणों से दुर्गुणों पर जीत पाना है हमें।
तब विजय दशमी पुनः दिल से मनाना है हमें।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
