संकट के आने पर – आर . सूर्य कुमारी

vivratidarpan.com – किसी समय एक राजा हुआ करता था । उसका नाम रामसेन था । एक दिन राजा ने सोचा – मैं तो मनुष्य हूं, मनुष्य के अंदाज में जी रहा हूं,इसमें कोई मजा नहीं है,क्यों न ईश्वर को खुश कर जो जानवर चाहूं वही जानवर बन जाऊं । फिर जब चाहूं , मनुष्य बन जाऊं । उसने यह वरदान पाने के लिए भारी तपस्या की । ईश्वर प्रकट हुए और वरदान देकर अन्तर्ध्यान हो गए ।
राजा को बड़ा मजा आया । बड़े शीशे के सामने खड़े होकर उसने खुद को कई जानवरों के रूप में देखा । उसके मन में आया कि क्यों न मैं अपने राज्य के जंगलों में क्या हो रहा है , यह देख आऊं ।
तब एक दिन राजा घोड़े पर सवार होकर एक निर्जन स्थान पर पहुंच गया । घोड़े को एक जगह बांधकर वह खुद कुत्ता बन गया और जंगल में चला गया । जहां उसका सामना एक शेर से हो गया,शेर को देखते ही राजा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई । राजा ने कहा — हे शेर मुझे मत खाओ , मैं तुम्हारे राज्य का राजा हूं ।
शेर ने कहा – उल्टी बात ! मैं इस इलाके का राजा हूं । इस जंगल में मेरी चलती है । आज मैं एक मनुष्य का शिकार करने के चक्कर में हूं , तू जा अपने रास्ते पर ।

दो चार कदम बढ़कर शेर फिर वापस आया और बोला -तुम्हारे पास से मनुष्य की बू आ रही है । मैं तुम्हें खाऊंगा ।

राजा ने दिमाग चलाया और बोला रुको,मैं पांच मिनट अपने भगवान की पूजा कर लूं ?

शेर बोला – कर लो पूजा । कम से कम मरने से पहले उसका नाम तो ले लो ।
तब शांत मन से राजा ने सोचा – अगर मैं मनुष्य बनूं तो भी ये मुझे खा जाएगा । अगर मैं इसकी तरह शेर बन जाऊं तो भी ये मुझे खा जाएगा , क्योंकि मेरी ताकत व सामर्थ्य तो इन्सान की है । अगर मैं विशालकाय हाथी बन जाऊंगा तो भी मेरे पास से मनुष्य की ही बू आएगी, लेकिन कद के आगे हर कोई बौना पड़ जाता है । मैं हाथी बन जाता हूं तब शायद ये शेर मुझे छोड़ दे या नहीं तो खाए और अंत में फिर खाए तो खा जाए ।

अब राजा कुत्ते से हाथी बन जाता है । हाथी को देखकर शेर बोलता है – तुम थोड़े रुक जाओ , मैं भी अब अपने भगवान की थोड़ी सी पूजा कर लेता हूं ।

राजा कहता है – जरूर पूजा कर लो । मुसीबत में वही याद आता है ।

शेर अपने आप से कहता है – यह कैसा कुत्ता है,जो कुत्ते से हाथी बन गया । इसे कहां से खाना शुरू करूं । सूंड़ , पैर , पूंछ – कहीं से भी आक्रमण करने में खतरा है । अगर इस अजीबोगरीब जानवर को मैं आधा या पूरा खा भी लेता हूं तो कहीं मेरा पाचन ही न बिगड़ जाए और मैं मर जाऊं । देखो-देखो वह कैसे पैर , सूंड़ और पूंछ को हिला रहा है । यह कोई हाथी नहीं कोई जादू है । इसके चक्कर से निकल जाने में ही फायदा है , नहीं तो आफत है और शेर ऊंची – ऊंची छलांगें लगाता हुआ जंगल में चला जाता है । राजा मुक्त होकर महल चला जाता है ।

सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमेशा अर्जित की गई कलाओं का इस्तेमाल दिमाग से सोच – समझकर ही कर करना चाहिए । (विभूति फीचर्स)

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