विद्यावती का दुलारे,किशन का पुत पप्यारे,
खालसा की नेक पहचान थे भगत सिंह ।
जालियां वाला घाव, दिल में संजोए रखा,
वीरता का ख़ास प्रतिमान थे भगत सिंह ।।
दासता की बेड़ियों को, तोड़ने के लिए आये,
आज़ादी का एक उन्वान थे भगत सिंह ।
पत्थर के देवता तो, कुछ नहीं कर पाए ,
क्रांति वीर देव के समान थे भगत सिंह।।
मौत नहीं जीवन है,मात को संदेश दिया,
लक्ष्य आज़ादी का धार जिए थे भगत सिंह ।
देख देख दासता की , बेड़ियों में भारती को ,
शोणित की वारुणी को पिए थे भगत सिंह।।
गोरों की सत्ता की नींव,हिला कर जाऊंगा मैं,
लक्ष्य यही वक्ष धार लिए थे भगत सिंह।
देश की असेंबली में,जोर का धमाका किया ,
गोरों के समक्ष क्रांति किए थे भगत सिंह।।
केश और कड़े को भी , देह से उतार दिया,
साक्षात त्याग बलिदान थे भगत सिंह ।
इंकलाब वाला,इस देश को आलाप दिया ,
राणा व शिवा जैसे महान थे भगत सिंह ।।
फांसी के चबूतरे को , रंगशाला बना दिया ,
बसंती छटा का परिधान थे भगत सिंह ।
झूम झूम चूम लिया,फांसी वाले फंदे को ,
क्रांति की पताका अभियान थे भगत सिंह ।।
देश हित प्राण दिए , हैं भारती को त्राण दिए,
नौजवान खून का उबाल थे भगत सिंह।
देश हित जिए और, मौत से अमर हुए ,
त्याग बलिदान की मिसाल थे भगत सिंह।।
भारती से किया प्यार,साम्यवादी थे विचार,
राष्ट्र भक्ति भाव में विशाल थे भगत सिंह।
राष्ट्र चेतना की आग ,देश में जला के गए,
क्रांति की मशाल और ज्वाल थे भगत सिंह।।
जसवीर सिंह हलधर, देहरादून
