शंखनाद गूंज रहा है ,
जागो….जागो….जागो ।
यह विजय तिरंगा यात्रा है ,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक ।
आंदोलित है जनमानस —
इस दिशा से उस दिशा तक ।
भारत के आंगन में आई —
खुशियों की बहार है ।
शंखनाद गूंज रहा है —
जागो….जागो….जागो ।
मां भारती की चरण दीप्ति से —
भारत वर्ष आलोकित है साधू ।
संवर जाए यह देश – जीवन ,
देश में प्राणों का हलचल है साधू।
हर ओर अमृत- वर्षा है ,
हल्की-हल्की फुहार है ।
शंखनाद गूंज रहा है —
जागो….जागो….जागो ।
शेरनी के दूध से पले —
भारत के योद्धा ये ।
जान की बाजी लगाकर —
वीर और वीरांगनाएं ये ।
आज भारत के घर-घर में —
वीर रस का प्रवाह है ।
शंखनाद गूंज रहा है —
जागो….जागो….जागो ।
शंखनाद गूंज रहा है —
जागो….जागो….जागो ।
शंखनाद गूंज रहा है —
जागो….जागो….जागो ।
– आर. सूर्य कुमारी (विभूति फीचर्स)
