शंखनाद गूंज रहा है – आर. सूर्य कुमारी

शंखनाद गूंज रहा है ,

जागो….जागो….जागो ।

 

यह विजय तिरंगा यात्रा है ,

कश्मीर से कन्याकुमारी तक ।

आंदोलित है जनमानस —

इस दिशा से उस दिशा तक ।

भारत के आंगन में आई —

खुशियों की बहार है ।

 

शंखनाद गूंज रहा है —

जागो….जागो….जागो ।

 

मां भारती की चरण दीप्ति से —

भारत वर्ष आलोकित है साधू ।

संवर जाए यह देश – जीवन ,

देश में प्राणों का हलचल है साधू।

हर ओर अमृत- वर्षा है ,

हल्की-हल्की फुहार है ।

 

शंखनाद गूंज रहा है —

जागो….जागो….जागो ।

 

शेरनी के दूध से पले —

भारत के योद्धा ये ।

जान की बाजी लगाकर —

वीर और वीरांगनाएं ये ।

आज भारत के घर-घर में —

वीर रस का प्रवाह है ।

 

शंखनाद गूंज रहा है —

जागो….जागो….जागो ।

 

शंखनाद गूंज रहा है —

जागो….जागो….जागो ।

शंखनाद गूंज रहा है —

जागो….जागो….जागो ।

– आर. सूर्य कुमारी (विभूति फीचर्स)

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