विभाजन विभीषिका – जसवीर सिंह हलधर

 

रात आधी का बुरा इतिहास भी है ।
ऐक ऐसा दर्द दिल के पास भी है ।।

कौम के दो फाड़ होने की मुसीबत ।
खून से हमने अदा की नेक कीमत ।।
दर्द से पहचान है वर्षों पुरानी ,
देश बँटने का हमें अहसास भी है ।।
रात आधी का बुरा इतिहास भी है ।।

रात काली थी बड़ा तूफान आया ।
एक मज़हब पर चढ़ा था प्रेत साया ।।
सत अहिंसा भूल बैठे राह अपनी ,
राजनैतिक मूल्य का परिहास भी है ।।
रात आधी का बुरा इतिहास भी है ।।

हानि इससे और ज्यादा क्या करेंगे ।
वो फिरंगी नरक में पानी भरेंगे।।
लालची नेता न समझे चाल उनकी ,
वस्त्र खादी में छुपा कुछ हास भी है ।।
रात आधी का बुरा इतिहास भी है ।।

एक हिस्सा भेंट बटवारे चढ़ा है ।
कुछ हमारे पास कुछ उनके पड़ा है ।।
सात दसकों से सतत है जंग जारी ,
ताज “हलधर” देश का वह खास भी है ।।
रात आधी बुरा इतिहास भी है ।।
– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

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