धन रूप सोना रखो,
मन रूप में मीत ।
प्रीत रखो मित्र संग,
गाओ खुशी के गीत ।
आनंद-उमंग रहें
सब परिवार संग ।
स्वस्थ रहे
शरीर का हर एक अंग ।
लो जीवन का आनंद,
दूर रहो अहंकार से ।
शांत रखो मन,
रखो हृदय में राम तो
पास न रहे रावण से ।
विजयादशमी का पर्व है,
रहे धन-धान्य से भरा ।
सुखी-आनंदी हो
घर-आँगन सदा ।
– प्रदीप सहारे,नागपुर, महाराष्ट्र
