वर्षा फुहार – श्याम कुंवर भारती

 

आप अकेले क्यों भींग जाने लगे ।

बारिश में मुझे क्यों भूल जाने लगे।

 

रिमझिम फुहार वर्षा अंग सिहराये।

यादों के झरोखों में बदन लहराए।

हवाओं के संग जुल्फ उड़ जाने लगे।

बारिश में मुझे क्यों …………।

 

छाई है हर तरफ धरती में हरियाली।

तेरे बिना तन्हा और दिल भी है खाली।

जलते दिल पर नहीं बरस जाने लगे।

बारिश में मुझे क्यों ……………।

 

तुम साथ होते बरखा बहार आ जाती।

दोनों संग भींगते ठंडी फुहार आ जाती।

मेरे बग़ैर आप क्या गुनगुनाने लगे।

बारिश में मुझे क्यों ………….।

 

भींग रहे है धरती और आसमान।

झूमें डालियां खिली फूलों मुस्कान।

होके मगन आप थिरक जाने लगे।

बारिश में मुझे क्यो………….।

 

आया बारिशों का मौसम मिलने की चाहत है।

करो प्यार की वर्षा मिले दिल को राहत है।

भारती प्यार में क्यों खिल जाने लगे।

बारिश में मुझे क्यो भूल जाने लगे।

– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड

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