यकीन हम भी करें उस पर, लेकिन मिला नहीं ऐसा।
हमसे दगा जो करें नहीं, आया नजर नहीं ऐसा।।
यकीन हम भी करें उस पर———————।।
यूँ तो हजारों मिले हैं, मतलबी, झूठे और शातिर।
कुटिल चालें चलने वाले, धोखा देने में जो है माहिर।।
बदले नहीं जो रंग अपना, चेहरा मिला नहीं ऐसा।
यकीन हम भी करें उस पर——————–।।
जरूरत जिसे हो दौलत की, और महलों में रहने की।
कैसे करेगा आबाद वह, कोशिश खुशी हमें देने की।।
दर्द हमारा जो बांटे यहाँ, जिगर देखा नहीं ऐसा।
यकीन हम भी करें उस पर——————-।।
कहते हैं खुद को जो सच्चा, मुकरते हैं जुबां से क्यों।
छोड़कर साथ मुसीबत में, बिछुड़ जाते हैं ऐसे क्यों।।
दिल को खिलौना समझे नहीं, हमदर्द मिला नहीं ऐसा।
यकीन हम भी करें उस पर——————–।।
हमसे जुदा हुआ है वो ही, शक नहीं था हमें जिस पर।
अब वह खुश है उनके संग, मतलब हमसे पूरा कर।।
छोड़े नहीं साथ जीवन भर, हमराह मिला नहीं ऐसा।
यकीन हम भी करें उस पर———————।।
– गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)
