( 1 ) लूट
सके तो लूट ले,
राम नाम की लूट !
अंत समय पछताएगा..,
जब प्राण जाएंगे छूट !!
( 2 ) छूट
सके भव सागर से,
ऐसे करले कुछ उपाय !
अंत समय पछताएगा..,
करे न धर्मपुण्य कार्य !!
( 3 ) कार्य
कारण बनें फल के,
लोभी जीव नरक जाए !
अंत समय पछताएगा…,
करनी आगे तेरी आए !!
( 4 ) आए
आगे जो बोए पीछे,
उससे बचा न जाए !
अंत समय पछताएगा…,
चल बिगड़ी सुधारता जाए !!
( 5 ) जाए
वही संग-साथ हमारे,
जो कुछ बाँटे लुटाएं !
अंत समय पछताएगा…,
स्वयं को बदलता जाए !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
