नव भारत निर्माण के, शिल्पी थे सरदार।
सम्मुख बल्लभ के हुआ, नत मस्तक संसार।।
अखंडता की नींव पर, भारत बना महान।
ऋणी सदा यह देश है, करता है अभिमान।।
धन्य हुई भारत धरा, पाकर ऐसा पूत।
बँटा हुआ यह देश था, बाँध दिया इक सूत।।
कहलाये भारत रतन, मिला अतुल सम्मान।
राष्ट्र एकता दिवस पर करते उन्हें प्रणाम।।
– डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड
