रामायण केंद्र, जबलपुर द्वारा “गुरु-तत्व” पर एक परिसंवाद कार्यक्रम का हुआआयोजन

vivratidarpan.com जबलपुर – रामायण केंद्र जबलपुर द्वारा वैशाली परिसर स्थित मंदिर प्रांगण में “गुरु-तत्व” विषय पर एक परिसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले मंदिर के राम दरबार में दीप-प्रज्वलन किया गया। तदोपरांत प्रबुद्व वक्ताओं के द्वारा अपने -अपने विचार व्यक्त किए गए। इस अवसर पर महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष श्रीमती अलका श्रीवास्तव ने बताया कि मनुष्य से मनुष्यता तक की जो यात्रा है वह गुरु के बिना पूर्ण नहीं हो सकती। डॉक्टर राजेंद्र नेमा ने कहा कि जिस तरह अर्जुन और संजय को दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई थी वो एक सामान्य मनुष्य को तब तक प्राप्त नहीं हो सकती जब तक उस पर गुरु की कृपा न हो। कार्यक्रम में शर्मा जी द्वारा कहा गया कि गुरु की कृपा हर किसी पर नहीं हो सकती और यदि आप पर गुरु की कृपा है तो उनके सतत संपर्क में आप रहिए बिना गुरु कृपा कुछ संभव नहीं है। इस विषय में डॉ.विजेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मनुष्य अहंकार के कारण कुछ देख नही पाता, इसलिए हमें गुरु की शरण में जाकर अहंकार के अंधकार से प्रकाश की ओर जाना चाहिए। रामायण केंद्र के संयोजक इंजीनियर संतोष कुमार मिश्र “असाधु” ने कहा कि हमारे यहाँ गुरु बहुत सारे है पर उनमें से सही गुरु का चयन करना बहुत मुश्किल कार्य है। भगवान दत्तात्रेय के तो कुल 24 गुरु हुए हैं इसलिए गुरु की संख्या अनंत हो सकती है और सबके भीतर वही एक गुरु तत्व मौजूद है फिर भी अज्ञानतावश वह सदैव इधर-उधर भटकता रहता है। डॉ. विवेक चंद्रा जी ने कहा की गुरु एक शिक्षक,मार्गदर्शक होता है जो सांसारिक माया से दूर करने करने में सहयोग करता है। कार्यक्रम की मंच संचालिका डॉ. नेहा शाक्य ने कहा की गुरु वह है जो तीनों प्रकार के दुःख अर्थात आध्यात्मिक, अधिदैविक, अधिभौतिक दुखों से मुक्ति दिलाये। श्री अवध नारायण श्रीवास्तव जी ने कहा की गुरु जो कहे उसके अनुरूप हमें जीवन जीना चाहिए और अपने गायन के माध्यम से गुरु की महिमा का बखान किया । विवेक अग्रवाल ने कहा की गुरु ही हमें भव सागर से पार करवाते है। इस कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार डॉ. नेहा शाक्य ने किया। कवि संगम त्रिपाठी ने बताया कि रामायण केन्द्र जबलपुर अपनी संस्कृति को समृद्ध बनाने हेतु निरंतर प्रेरणादायक कार्य कर रही है।

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