पच्चीस वर्षों का ये सफ़र, विश्वास का सार बना।
साथ निभाते हुए इस राह में, अपनों संग घर बना।
हर मौसम में दो हाथों का, यह अटूट साथ बना।
प्रेम, समर्पण दोनों के, जीवन का आधार बना।।
भैया का संबल भाभी की क्षमता, एक दूजे में रमी।
गृह–आँगन की हर दीवार, उनकी खुशबू से भरी।
कठिन घड़ी हो या उत्सव, संग रहने की रीत बनी।
दोनों की यह युगल कहानी, सच्चे रिश्ते से गढ़ी।।
समय के साथ न फीका पड़ा, रिश्ते का उजियारा।
हर दिन नया सवेरा हो, हर पल में नव रस जगा।
साधारण जीवन को भी, उन्होंने उत्सव कर डाला।
प्रेम बना आभूषण जहां, सादगी ने रूप सँवारा।।
रजत जयंती पर शुभेच्छा, सुख–शांति हो अपार।
आने वाले स्वर्णिम वर्षों में, खिले यह परिवार।
यूँ ही साथ चलते रहें, हर पथ पर विश्वास अपार।
ईश्वर करे यह बंधन रहे, प्रेम भरा अटूट अपार।।
(अंजू भाभी-सुधीर भैया की वैवाहिक वर्षगांठ की रजत जयंती पर विशेष)
डॉ निधि दीपिका बोथरा जैन, इस्लामपुर, पश्चिम बंगाल
