यह धरती हमारी है माता – गुरुदीन वर्मा

 

यह धरती हमारी है माता।

यह देश हमारा है पिता।।

जिसने जन्म दिया है हम सबको।

ओरे लोगों, नहीं तुम भुलावो उसको।।

यह धरती हमारी———————–।।

 

लेकर दुःख बदले में खुशी, हमको दी है सदा इसने।

रह गई खुद चाहे प्यासी, प्यासा नहीं हमको रखा इसने।।

इसके ऑंगन में हम खेलें हैं

इसके आँचल में हम फूले- फले हैं।।

जिसने पलकों पर बिठाया हमको।

ओरे लोगों, नहीं तुम रुलावो उसको।।

यह धरती हमारी———————-।।

 

कहते हो क्यों तुम,यह मेरा, वह तेरा।

एक चमन के फूल हम, एक है अपना बसेरा।।

जहाँ हमने सपनें सँजोये।

जहाँ हमने दीपक जलाये।।

जिसने दिखाई है मंजिल हमको।

ओरे लोगों, नहीं खाक बनावो उसको।।

यह धरती हमारी———————।।

 

खुशकिस्मत है हम तो, हमको मिला है आज़ाद वतन।

हम क्यों लड़े यहाँ खून बहाये, रखें यहाँ चैनो-अमन।।

रहे मिलकर यहाँ हम यारों।

तस्वीर अपने वतन की सँवारों।।

जिसने दिया है, जीवन हमको।

ओरे लोगों, नमन करों तुम उसको।।

यह धरती हमारी——————–।।

– गुरुदीन वर्मा आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां राजस्थान)

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