vivratidarpan.com – मेरे प्यारे बड़े बुजुर्गों, छोटे-बड़े भाइयों, भाभियों, बहनों- बहनोइयों और शुभ-अशुभचिंतक मित्रों यथोचित प्रणाम, नमस्कार, नववर्ष 2026 की आप सभी को यमराज मित्र की ढेर सारी बधाइयाँ, शुभकामनाएं। आप स्वस्थ-अस्वस्थ, खुश-नाखुश रहें, दीर्घायु-अल्पायु हों, आपका परिवार, सुरक्षित- असुरक्षित रहें, रोजी-रोजगार सलामत रहे न रहें, अड़ोसी-पड़ोसी, नाते-रिश्तेदार आपसे खुश-नाखुश रहें, आपका भला -अनभला हो, आप जिएँ या मरें, अजारी- बीमारी आपकी दोस्त-दुश्मन बनें, प्रसन्नता-अप्रसन्नता, सफलता – असफलता आपके कदम चूमें या कोसों दूर रहे, मेरी बला से। बस! आप शराफत से नये साल की नई किरण के साथ जैसे भी हो मन-बेमन से मेरी बधाइयों का टोकरा स्वीकार कीजिए, उसके बाद आप उसे सहेजो या फेंक दो। मुझे इससे कोई मतलब नहीं है।
अरे भाई! मैं तो आपको अपने और अपने मित्र की ओर बधाइयाँ शुभकामनाएं दे रहा हूँ और आपके हाव-भाव बिगड़ रहे हैं? तो एक बात कान खोलकर सुन लीजिए, मैं जो दे रहा हूँ, चुपचाप बिना किसी हील-हुज्जत के ससम्मान स्वीकार कीजिए और फिर जो मर्जी करते रहिए। वैसे भी कौन-सा आप मेरा भला चाहते हैं, चाहते भी हैं तो कितना? सब जानता हूँ। आपका सारा हिसाब-किताब है मेरे पास। फिर भी मेरी सज्जनता आपको इतनी नागवार लग रही हो, तो कहिए! अपनी औकात दिखाऊँ। लेकिन मैं आपकी तरह बेवकूफ नहीं हूँ, जो आप जैसे समझदार बेवकूफों के चक्कर में अपनी उर्जा, समय व्यर्थ गवाऊँ। वैसे ये बात आप समझ भी नहीं सकते। कोई बात नहीं, सब समझ जाओगे, बस एक बार मेरे झाँसे में आ तो जाओ। माथा पीटते और मेरे ही शुभकामना के टोकरे से शुभकामनाएँ बाँटते -बाँटते थक जाओगे, पर ये टोकरा खाली नहीं कर पाओगे। क्योंकि इसमें हर किसी के अनुरूप शुभकामनाओं का भंडार है। कोई निराश भी नहीं होगा और आपका कुछ खर्च भी नहीं होगा।
खर्च की बात से याद आया, खर्च तो मेरा भी कुछ नहीं हो रहा है, क्योंकि यमलोक से मुझे बुद्धिमानी का नोबेल पुरस्कार सिर्फ इसीलिए तो मिला है कि बिना खर्च के मैंने यमलोक की अर्थव्यवस्था को राकेट से भी तेज गति से दौड़ा दिया। वहाँ मेरा बड़ा सम्मान है, जाने कितने मंदिरों में मेरी पूजा हो रही है। आप चाहें तो मेरी पूँछ पकड़ सकते हैं, धरती की बात तो धरती वाले ही बता सकते हैं, मगर ये मेरा वादा है कि यमलोक में आपका जलवा जरुर बढ़ जायेगा, क्योंकि आपका नाम मुझसे जो जुड़ जायेगा, तब यमराज का नाम भी आपके शुभचिंतकों में जुड़ जाएगा।।
मैं जानता हूँ कि आपके पास दिमाग नहीं है, आपको तो बस जीते रहने की चिंता है, भले ही भूखे रहना पड़े, भीख का कटोरा लेकर चलना पड़े, अस्पताल के बिस्तर पर एड़ियाँ रगड़ना पड़े। मगर मैं आपसे ये सब क्यों कह रहा हूँ? चलिए ! कोई बात नहीं, अच्छा ही तो है, कि आप सौ क्या चार -पाँच सौ साल जिएँ या अभी टें..एं…एं…बोल जाएँ। मुझे क्या फर्क पड़ने वाला है। वैसे भी मैं मुफ्त में कुछ भी नहीं करता। जब मुफ्त में मैं अपने माँ- बाप को माँ- बाप नहीं कहता, तो आप किस खेत की मूली हो। वो तो भला हो मित्र यमराज का, जो आपको मुझसे शुभकामनाएं मिल रही हैं, क्योंकि वो मेरा यार है। हम दोनों का कुछ भी अलग नहीं है। इसलिए यह बात भी दिमाग अच्छे से बिठा लें, कि ये शुभकामनाएं भी मेरी नहीं हैं।
फिर भी यदि आपको मुझसे शुभकामना पाने की खुजली हो रही है, तो ठीक है, आप भी क्या याद करोगे कि किसी दिल वाले से पाला पड़ा है, चाहें तो अपने परिवार के अन्य सदस्यों, इष्ट मित्रों, नाते-रिश्तेदारों, अड़ोसियों – पड़ोसियों को भी बुला लो। क्योंकि ये सौभाग्य फिर कभी नसीब नहीं होगा।
अब मैं आपको अपनी शुभकामनाएं सिलसिलेवार ढंग से दूँ, उससे पहले मैं एक बात साफ कर दूँ, कि मेरी शुभकामनाएं सिर्फ औपचारिकता है और इसमें खर्च होने वाली उर्जा/समय की कीमत लगती है, मगर आज मैं आप पर इतना अहसान तो करुँगा ही कि आपसे कोई कीमत नहीं लूँगा।
मेरी शुभकामना है कि नये साल की नई किरण के साथ ही यह सिलसिला शुरू हो जाए कि आपकी हर वो ख्वाहिश जरुर पूरी होने लग जाए, जो हर किसी को दुख देने वाली हो, आप और आपका परिवार भले ही स्वस्थ, प्रसन्न, संपन्न, सात्विक, मर्यादित, संवेदनशील, सभ्यता, अनुशासन से दूर रहे, मगर आपके दोस्त हों या दुश्मन, हमेशा बीमार, कंगाल रहें, उनके बच्चे आवारा, बदमाश निकलें, उनकी इज़्ज़त का कबाड़ा होता रहे, हमेशा लड़ते – झगड़ते, कोर्ट – कचहरी के चक्कर लगाते रहें, अस्पताल उन सबका धाम बने, सुख-शान्ति से छत्तीस का रिश्ता रहे। वैसे भी आपने कब किसी का भला ही चाहा है? आपके मन में तो लड्डू फूट रहे होंगे। वैसे इतनी अक्ल तो मुझे भी है कि बेवकूफों को भला कोई समझा भी कैसे सकता है? फिर आप मेरे कोई अपने तो हो नहीं, जो मैं आपको शुभ-शुभकामनाएं देकर अपना बेदाग रिकॉर्ड दागदार कर लूँ। जैसे आप शुभकामनाओं के औपचारिकताओं की गठरी लेकर बाँटने की सोच रहे हैं, तो वो पहल मैंने कर दी। न आप दिल से शुभकामनाएं देने वाले हैं, न मैंने आपको दिया और न ही भविष्य में ऐसा अपराध करने का इरादा है। वैसे सबको पता है कि इन शुभकामनाओं का कोई मतलब इसलिए भी नहीं है कि अंग्रेजियत के लबादा ओढ़ने के चक्कर में हम भारतीयों का जीवन ही औपचारिकताओं की भेंट चढ़ता जा रहा है। अब भारतीय तो वास्तव में जी भी नहीं रहें हैं, सही बात तो यह है अंग्रेजियत की खाल ओढ़ने की तमाम कोशिशों के साथ खुद को ढो रहे हैं। अपना समय, सभ्यता, संस्कार, संस्कृति, मानवता, सरलता, संवेदना, मर्यादा सब खोते जा रहे हैं। इतना तक ही नहीं, बड़े गुमान में फूले भी नहीं समा रहे हैं।
बस! इसीलिए तो हम भी औपचारिकताओं की मोटी चाशनी के साथ नये वर्ष की बधाइयाँ, शुभकामनाएं दे रहे हैं। यह और बात है कि हम तो दिल से देने की सोच ही रहे हैं, मगर आप इसे औपचारिकताओं के खोल में लिपटा मानने की कसम खाकर बैठे हैं। तो हम भी कम नहीं हैं बरखुरदार! मजबूरी में ये शुभकामनाएं भी तो हम अपने मित्र यमराज की ओर से ही देकर अपना नाम कर रहे हैं।
चलते-चलते दिल से नववर्ष की शुभकामनाओं संग 2025 को विदा करने के साथ नववर्ष 2026 में अपना उल्लू सीधा करने की कसम खा रहे हैं। अंग्रेजी में हैप्पी न्यू ईयर और हिंदी में शुभ नववर्ष 2026 का स्वागत भी तो आखिर आप सबके साथ हम भी तो हर्षोल्लास से कर रहे हैं।- सुधीर श्रीवास्तव,गोण्डा, उत्तर प्रदेश
