लोग जो कल साथ थे
होंगे नहीं कल जानता हूं।
सृष्टि के इस नियम को
कुछ तो पहचानता हूं।
आना जाना जीना मरना
सृष्टि का यह खेला
जो आया है वो जायेगा।
सदा नहीं कोई रह पाएगा।
काया नश्वर इतना जानो
मर्म जिंदगी को पहचानो।
तेरा-मेरा, मेरा-तेरा
सब कुछ यहीं है रह जाना
लोभ लालसा के वश में
खत्म अपना ईमान करे
क्यूँ अहम स्वार्थ के कारण
दूजे जन पर घात करे
रखो याद बस इक बात
साथ नहीं कोई देगा।
अंत समय जब आयेगा
प्रभु नाम ही साथ चलेगा।
नाम प्रभु का सुमिरन कर
नर जीवन को धन्य करो।
– श्रीमती निहारिका झा, खैरागढ़, राज छत्तीसगढ़
