वैष्णवी दुःख तारिणी सर्व कष्ट निवारिणी,
जग के संकट माते आप दूर करें अभी।
याचक से द्वार तेरे विपदा अनेक घेरे,
मात हम भक्तों पर दृष्टि डालिये कभी।
चरणों में मन लगे भक्ति रस में हैं पगे,
श्रद्धा से जो जपें नाम इच्छा पूर्ति हों सभी।
शुचिता के भाव सजें मोह माया जब तजें,
निश्छल मन भक्ति हो कृपा मिलेगी तभी।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
