मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि हमारे मन-मष्तिष्क,
और हाथों से ऐसा न हो,
कि जिसको सुधारने में,
लग जाये करोड़ों वर्ष।
मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि खर्च कुछ नहीं करना है,
सिर्फ बदलनी है हमको,
हमारी जीवन शैली जीने की,
जिससे कि पैदा हो,
हमारे वातावरण में एक महक।
मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि तुम रोज प्रार्थना करते हो,
रोशनी का रोज दीप जलाते हो,
और यह सूरज कभी अस्त नहीं हो,
कुछ कर्म हमको ऐसे करने हैं।
मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि मैं जी रहा हूँ गुलामों की जिंदगी,
बदनामी मेरा दामन नहीं छोड़ती,
बदनामी तुम्हारी नहीं हो,
तू दुनिया से नाराज नहीं हो,
हर चिंता से तू निश्चिंत हो।
मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ कि—————–।।
– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)
