मेरे हसीन ख्वाबों की रानी – गुरुदीन वर्मा

 

ना जानूँ कैसी होगी, ना मालूम कहाँ होगी, मेरे हसीन ख्वाबों की रानी।

उसको मैं क्या नाम दूँ , उसको कैसे बुलाऊँ, बसी है जो दिल में दीवानी।।

ना जानूँ कैसी होगी, ना मालूम कहाँ—————–।।

 

याद उसे क्या आती है मेरी, लेती है करवट क्या मेरी तरहां।

लिखती है क्या वो नाम मेरा, क्या वह संवरती है मेरी तरहां।।

उससे कहाँ मिलूँ मैं, उससे क्या कहूँ मैं, जो है मेरे लबों की कहानी।

ना जानूँ कैसी होगी, ना मालूम कहाँ—————–।।

 

मुखड़ा उसका क्या चांद सा होगा, फूलों के जैसी क्या हंसती होगी।

क्या उसकी आंखें हिरणी सी होगी, लहरों सी क्या उसकी मस्ती होगी।।

क्या लिखूँ उसको मैं खत में, कैसे उसको पुकारूँ मैं, जो होगी मेरी जिन्दगानी।

ना जानूँ कैसी होगी, ना मालूम कहाँ—————-।।

 

होगी नहीं कभी मोहब्बत की कमी, सदा खुश वह घर में रहेगी।

निभाऊंगा उससे मैं अपनी वफ़ाएँ, फूलों की तरहां महकती रहेगी।।

उसकी क्या शिकायत है, क्यों है इतनी वह शर्मीली, कहती नहीं क्यों परेशानी।

ना जानूँ कैसी होगी, ना मालूम कहाँ——————।।

– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद, तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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