मेरे राम – सुनील गुप्ता 

 

( 1 ) मेरे राम

बसते मेरे मन मंदिर,

करूँ उनकी पूजा, गुणगान उन्हीं के !!

 

( 2 ) हैं वही

मेरे प्रिय त्रिलोकी भगवान,

उन्हीं की शरण, चला आया मैं द्वारे !!

 

( 3 ) उनसा प्रिय

पुत्र आज्ञाकारी न देखा,

उनके समक्ष सभी लोभ सत्ता है हारी !!

 

( 4 ) उनकी नीति

उत्तम सभी कारज न्यारे,

चले तारते वो हमें भवसागर से पारे !!

 

( 5 ) उनकी अजान बाहु

राजीव लोचन हैं प्यारे,

देख जी न भरता, चलूँ उन्हें निहारे !!

– सुनील गुप्ता,जयपुर,, राजस्थान

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