मेरी कलम से – रुचि मित्तल

 

तसव्वुर में तुम्हारे रात भर सोयी नहीं हूँ मैं ,

बताओ तुम भी जागे हो कभी मेरे ख्यालों में।

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दोस्तों  का  साथ  हो तो कोई मुश्किल कुछ नहीं,

कोई खतरा कुछ नहीं है कोई हलचल कुछ नहीं।

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मुझको न राहे-इश्क़ का मतलब बताइये,

नक्शे क़दम पे मेरे ही रांझा-औ-हीर थे।

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मुझको  डरा  रहे  हो  ज़माने  खराब  से,

बदनाम मेरा नाम भी दुनिया में कम नहीं।

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दुनिया की सोहबतों का असर देख भाल कर,

अपने  ही  आप  पे  यक़ी बढ़ने लगा है अब।

©रुचि मित्तल, झझर , हरियाणा

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