मेरा आसमान – सविता सिंह

स वक्त तुमने कुछ न कहा,

मैंने कितना कुछ था सहा।

आज कहते हो रुक जाओ,

ढूंढ लिया जब अपना जहाँ।

पहली बार जब हम थे मिले,

शुरू हुए थे कुछ सिलसिले।

रूह को तुमने था छुआ,

लगता था चहुँ ओर फूल खिले।

तेरी साँसें अब मेरी धड़कन,

मेरे मन-मंदिर में तुम साजन।

तुझ पर वार दिया सर्वस्व,

अब तुम बिन कैसे बीते जीवन।

फिर करने लगी मैं इंतज़ार,

देर रात आते हर बार।

वो खामोशी, वो नीची नज़रें

खो दिए तुमने अपने अधिकार।

अब आड़े आया मेरा स्वाभिमान,

सबसे प्यारा मेरा सम्मान।

आजादी चाही थी तुमने मुझसे,

कभी थे तुम मेरा अभिमान।

तुम्हें मुबारक तुम्हारा जहान

अब मेरी अलग ज़मीन,

मेरा अलग आसमान।

सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

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