मातृ दिवस – क्षमा कौशिक

सबसे पहले नमन हमारा भारत माता को।

जिसकी माटी में जन्में उस भाग्य विधाता को।।

 

खेल कूद कर बड़े हुए जिसकी रज चंदन में।

शब्द नहीं जो अर्पित कर दूँ उसके वंदन में।।

उसकी ही गोदी में अंतिम पल सबका होगा।

मातृ भूमि रक्षार्थ समर्पित यह जीवन होगा।।

 

जन्म दायिनी माता का हम पर उपकार बड़ा।

पल-पल जिसको सुख में दुख में पाया पास खड़ा।

संस्कारों के मोती जड़ कर जिसने हमें गढ़ा।

उससे ही हम सबने पहला जीवन सबक पढ़ा।।

ही हम सबने पहला जीवन सबक पढ़ा।।

 

उस प्यारी भोली सी माँ की ममता है अनमोल।

कुछ भी कर जाने को प्रेरित करते उसके बोल।।

सब कुछ देने वाली माँ को क्या दें हम उपहार।

उऋण नहीं हम हो पायेंगे इतने हैं उपकार।।

 

कर्ज सदा ही चढ़ा रहेगा तुम दोनों का मुझ पर।

मैं भी ऐसा कुछ कर पाऊँ गर्व करे तू मुझ पर।।

भारत माता सबकुछ अर्पण कर दूँगा मैं तुझपर।

यही कामना जन्म सदा लूँ तेरी ही धरती पर।

– क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड

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