अम्बे माँ जय भवानी अनुपम है कहानी,
रूप अलौकिक देख भाव दिल में भरें।
दिव्यता बड़ी निराली भरें सदा झोली खाली,
ममता की मूरत को भक्त नमन करें।
दानवों से मुक्ति देतीं दुख को निवार देतीं,
नये नये रूप धर पीर सभी की हरें।
कृपा बरसातीं माता सबसे निभातीं नाता,
उनके प्रताप से संकट विपत्ति टरें।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
