मत काटो श्वासों की डोर – सुनील गुप्ता

 

( 1 ) मत काटो

श्वासों की डोर,

लगाते चलो वृक्ष चहुँओर  !

ये देते चलें स्वच्छ प्राण वायु हमें…,

सतत महकाते रहें जीवन की भोर !!

 

( 2 ) मत भूलो

वन उपवन जंगल,

फल-फूल औषधि हम पे बरसाएं !

हैं ये सभी अक्षय ऊर्जा के स्रोत…,

चलें हमारे जीवन कानन को खिलाए !!

 

( 3 ) वृक्ष लगाएं

खूब हरियाली बढ़ाएं,

जीव-जंतुओं संग पर्यावरण को बचाएं !

चलें धरा को धानी चुनरिया में सजाए…,

आओ, दसों दिशाएं खुशहाली फैलाएं !!

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

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