नायक _ कहा कईसे खेलब तोहरा संग होलिया हे जान,
लिहले बानी भरी के आपन रंग झोरिया हे जान ।
नायिका _ कईसे आई राजा घरवा चले ना बहाना।
देखिहे त लोगवा मरीहे हमके बड़ा ताना।
खेलल जाई छिप के राजा अबकी खूब होलिया हे जान
नायक_ लिहले बानी भरी के ……।
नायक _ सखियां के बहाना गोरी आवा खेले खातिर होरी।
नाही त हमहूं तोहसे करब बड़ा बलजोरी।
हाली आवा होरी खेले गऊवाँ के पिछवरिया हे जान।
नायिका _ खेलल जाई छिप के …..।
नायक _ भरी के पिचकरिया में हरा पियर लाल रंग डालब ।
अबीरवा गुलाल गलवा गोरे तोहरे हम मलब।
छोड़ब नाही अबकी अँचरवा केवनों छोरिया हे जान।
नायिका _ खेलल जाई अबकी छिप के……।
नायिका _ सालभर पर आइल बाड़े फागुन के मस्त महीनवा।
मस्ती में झूमत बाड़े धरती औरी खेत खरिहनवा।
नायक _ सहल नाही जात बाड़े तोहसे तनको दूरिया हे जान।
नायिका _ खेलल जाई छिप के अबकी राजा खूब होलिया हे जान।
– श्याम कुंवर भारती ( राजभर )
बोकारो, झारखंड , मान.9955509286
