अइले अब समधी के स्वागत करा,
मन भर के गारी सुनावा,
हाय सियाराम के भजो ।
हाथी घोड़ा ना लिअइले डोलिया कहार,
लिअईले गदहा दुआर,
हाय सियाराम के भजो।
अगुवा के मूंछ जइसे कुकरा के पोंछ ,
आया इनकर धोतिया के खींच
हाय सियाराम के भजो।
भसुर पहीनें अंगूरी अंगूठी नगीना
लगे जईसे बड़का कमीना,
हाय सियाराम के भजो।
बाराती साले लगे मौगा भड़ुवा ,
लगावे कपरा में तेल कड़ुआ,
हाय सियाराम के भजो।
दुल्हा के बहिन बाड़ी बड़ी होशियार,
रखेली चार चार गो यार ,
हाय सियाराम के भजो।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो, झारखंड , मॉब.9955509286
