आइल पितर पक्ष पूर्वजन के दिन बा शुरुआइल।
पितरन मान देवता चढ़ावे पानी दिन बा आइल ।
करिहा अर्पण तर्पण ख़ुश होइहे सभ पितर देवता।
बुझात बा सुख के दिन घर में हाली बा नियराइल।
जियला पर होखे जेतना सेवा मरला मिले जियादा।
रही जहां आत्मा पूर्वज भाव दान तर्पण नज़ीदकाइल।
जाके नदी नाला भा पोखर अर्पण तर्पण करा मुंडन।
स्वर्ग से दिहे पितर अन्न धन सुख से घर बा भराइल ।
पितर पक्ष में कमी ना होखे भाव नियम धरम में।
देख घर परिवार के श्रद्धा पितर सभ बा मुस्काइल ।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखण्ड, मॉब.9955509286
