बैठी के भवनवा असमनवा में उड़ी कर
अपने भुलइलू पहड़वा देवी मईया।
नयनवा रतिया दिनवा झरे लोर ढर ढर ,
रहिया जोहत दिन बीतेला देवी मईया।
बहेला पवनवा दिनवा झर झर ताकि हम रहिया ओर,
काहे नहीं दिहलु दर्शनवा देवी मईया।
अखियां बन करी हियवा में धियान धरी,
कलिका के हाथ जोरी रोई देवी मइया।
जगवा में छोड़ी कर बलकवा तीयागी कर,
केकरा पर रिझइलू जमनवा देवी मईया।
भवानी के पूजी कर मनाई चरण धरी कर।
होजा अब सहाय लोगवा पुजैला देवी मईया।
– श्याम कुंवर भारती ( राजभर)
बोकारो, झारखंड, मॉब.9955509286
