ये भवानी मांगीला ना फैलाई के अंचरवा,
हम मनसा पुराइब न हो।
काहे रिसीयाइल मईया लट छितराई।
अपने बेटिया के गइलू काहे तू भुलाई।
ये मइया भरी दा न खाली अचरवा।
हम मनसा पुराइब न हो।
गंगा के पनिया से चरणीया तोर पखारब।
आठों पहरिया माई रुपवा तोर निहारब ।
ये मइया सुनी ला ना हमरो पचरवा ,
हम मनसा पुराइब न हो।
गोदिया में ललनवा देई दा घरवा धनवा भरी दा ।
सजना के लामी उमिरिया अंजोर अँगनवा करी दा।
ये मइया उमड़त आवा न हमरो दूअरवा।
हम मनसा पुराइब न हो।
निमिया के डार तोहके झुलवा झूलाइब।
मलिनीया से हार लेके तोहरे गरवा पहिनाइब।
ये मईया डाली दा न तनी हमरो पर नजरवा।
हम मनसा पुराइब न हो।
सोनवा के कंकही से केसिया तोहार झारब ।
अँचरा के कोरवा से रहिया तोहार बहारब।
ये मइया रही जा न टूटल घरवा,
हम मनसा पुराइब न हो।
– श्याम कुंवर भारती ( राजभर)
बोकारो,झारखंड , मॉब.9955509286
