हम ना छोड़ब ये माई राउरी चरणनिया,
नदनियां हमरो माफ करिहा ये राम,
बलकवा बुझी के।
हम अब करब ये माई राउरी पूजनिया,
नजरिया हमरी ओरिया तनी फेरिहा ये राम।
बलकवा बुझी के।
रची रची सिंगार माई तोहरो हम करब,
अड़हुलवा के हार गरवा टह टहइये ये राम।
अंजोरिया बनी के।
निमिया के गछिया चउरवा तोहरो हम लगाईब,
सोनवा के पलना झूलना हम लगाइब ये राम।
सोनरवा बनी के।
जगवा में नाही केहू तोहसे बाड़े बड़ा दयालु,
सूरतिया तोहरो बड़ा मन भावेला ये राम
चनवा बनी के।
अंखियों से ढर ढर बहे लोर ताकि हम तोहरी ओर,
भारती के मनसा अब पुरहइया ये राम,
सहइया बनी के।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो,,झारखंड, मॉब.9955509286
