भोरवे भोरवे अईली छठ घटिया उगी के करा हो अंजोर।
हाली उगा हो सूरज देव होला अरघीया के हो देर।
जगवा में बाड़ा तू ही साक्षात् एगो देवता।
देइब हम अरघीया ये दीनानाथ देहली तोहके नेवता ।
घटवा पर उमड़ल भीड़ बड़ा भारी होला बड़ा हो शोर।
हाली उगा हो सूरज देव…………..।
लेईके सुपवा गंगा के पनियां कमर तक बानी हम खाड़।
अवले ना उगला ये भास्कर बाबा लगेला हमके बड़ा जाड़।
दया करा दीनानाथ पूरा करा छठ बरतिया हो मोर।
हाली उगा हो सूरज देव………….।
तोहरे बिना दुनिया में होला ना कबों केवनो काम।
धरती पर जन्मे ना एको जीव ना होला भोर शाम।
उगा उगा हे सूरज देव ले ला अरघीया अब हो मोर।
हाली उगा हो सूरज देव होला अरघीया के हो देर।
- श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो,झारखंड मॉब.9955509286
