सावन में भारती भइले बदनाम हो
नजरिया से दूर कईलु सजनी।
लोगवा हमे तोहरे नाम से बुलावेला,
प्रेमवा के लुगती हीया लहकावेला।
बरसेले अंखियां शुबह शाम हो।
नजरिया से दूर कईलू………..।
गोरी कलइया हरियर चूड़ियां पहनाईब।
हरियर सड़िया सावन में पहनाईब।
गोदना गोदाईब सुनर आपन नाम हो।
नजरिया से दूर कईलू…………..।
बहियां के झुलवा में झूलवा झुलाइब।
करियर केसिया में गेंदा फुलवा सजाइब।
सवनवा में मारा जनी हमरो जान हो।
नजरिया से दूर कईलू……………।
उमड़ल उमरिया जईसे घुमडल बदरवा।
जान मारे अंखियां तोहरे चहकल कजरवा।
अंखियां ना मारा गोरी हमके बान हो।
नजरिया से दूर कईलू सजनी।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो झारखंड , मॉब.9955509286
