vivratidarpan.com – भूटान की राजधानी थिम्फू में हिंदी दिवस के अवसर पर “भूटान-भारत साहित्य महोत्सव” का भव्य आयोजन क्रांतिधरा साहित्य अकादमी के तत्वावधान में किया गया। इस दो दिवसीय महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 68 विद्वानों तथा भूटान के प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने अपनी साहित्यिक उपस्थिति दर्ज कराई।
महोत्सव के दौरान 13 विद्वानों की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया, जिनमें लुधियाना से उपस्थित सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. जसप्रीत फ़लक की चर्चित काव्य कृति “कैनवस के पास” का द्वितीय संस्करण भी लोकार्पित हुआ। यह अवसर हिंदी साहित्य के वैश्विक प्रसार का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा।
कार्यक्रम की विशेष कड़ी में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. जसप्रीत फ़लक ने की। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं, जीवन के विविध अनुभवों और समाज के प्रति अपनी गहन दृष्टि को प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी प्रतिभागियों ने भी कविता, कहानी, नाटक और शोध पत्रों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
भूटान के इस मनमोहक वातावरण में साहित्य और संस्कृति का उत्सव जैसे शब्दों और विचारों का महाकुंभ बन गया। यहाँ के लोगों का साहित्य के प्रति लगाव और कार्यक्रम के प्रति समर्पण इस आयोजन की भव्यता को और अधिक गरिमामय बना रहा।
साहित्य और समाज में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए डॉ.जसप्रीत फ़लक को “भारत-भूटान साहित्य रत्न सम्मान-2025” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके साहित्यिक अवदान और हिंदी भाषा के प्रति समर्पण का सार्थक प्रतीक है।
भूटान की यह यात्रा डॉ.फ़लक के लिए अविस्मरणीय रही। उन्होंने विशेष रूप से क्रांतिधरा साहित्य अकादमी और आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य की सरहदें मिटाकर दिलों को जोड़ते हैं और हिंदी को वैश्विक धरातल पर प्रतिष्ठा दिलाते हैं।
